ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने ईरान और अमरीका के बीच तनाव के चरम पर होने के बावजूद युद्ध की संभावना को ख़ारिज कर दिया है।
मंगलवार को तेहरान में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने कहा कि वाशिंगटन को पता है कि तेहरान के साथ युद्ध उसके हित में नहीं है।
उन्होंने कहा, अमरीका और ईरान के बीच सैन्य टकराव नहीं है, इसलिए दोनों के बीच युद्ध नहीं होने जा रहा है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई का कहना था कि दुश्मन का मुक़ाबला करने के लिए ईरानी राष्ट्र ने प्रतिरोध के विकल्प को चुना है, इसलिए कि वर्तमान अमरीकी शासन के साथ वार्ता, ज़हर का घूंट पीने समान है।
वरिष्ठ नेता का कहना था कि दोनों पक्षों के बीच इरादों की लड़ाई है और अंततः इस लड़ाई में जीत ईरान की होगी। अमरीका के नेतृत्व में ईरान के दुश्मन यह सोचते हैं कि कड़े प्रतिबंध ईरान को नुक़सान पहुंचा सकते हैं, हालांकि इस्लामी गणतंत्र का फ़ौलादी ढांचा, जनता और अधिकारियों के साहस से मज़बूत है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने जो बातें बयान की हैं उनमें बहुत महत्वपूर्ण और स्ट्रैटेजिक बिन्दु हैं। अमेरिका अपने पागलपन की कार्यवाहियों से क्षेत्र में अपनी कठपुतली सरकारों के माध्यम से ईरान को डराने- धमकाने का प्रयास कर रहा है परंतु ईरान और ईरानी राष्ट्र युद्ध के काल को भी देख चुके हैं और वह अमेरिकी शक्ति के पतन से भी अवगत हैं।
इस बात के बहुत अधिक प्रमाण हैं कि इस समय दुनिया में अमेरिकी शक्ति का पतन हो रहा है और अब बहुत से देश वर्चस्वाद और ज़ोर ज़बरदस्ती पर आधारित उसकी नीतियों को मानने के लिए पहले की तरह तैयार नहीं हैं।
अमेरिकी सरकार के आधिकारिक केन्द्रों की रिपोर्टों के आधार पर इस समय अमेरिका में चार करोड़ 10 लोख लोगों को भूख और असुरक्षा का सामना है जबकि पैदा होने वाले चालिस प्रतिशत बच्चे अवैध हैं, और इसी तरह अमेरिका में 22 लाख लोग जेलों में बंद हैं जो दुनिया की कुल जनसंख्या के दृष्टिगत विश्व में सबसे अधिक है।
इसी तरह मादक पदार्थों का सेवन करने वाले सबसे अधिक अमेरिका हैं और पूरी दुनिया में जो फायरिंग होती और उसमें जो लोग मारे जाते हैं उसका केवल 31 प्रतिशत भाग अमेरिका से संबंधित है यानी इसमें भी अमेरिका पहले स्थान पर है।
ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अमेरिका के साथ वार्ता के लक्ष्यों की ओर संकेत करते हुए कहा कि इसका वास्तविक अर्थ यह है कि आप सटीक लक्ष्यों को भेदने वाले मिसाइलों की संख्या कम करें ताकि अगर एक दिन हम आपको लक्ष्य बनायें तो आप जवाब न दे सकें।
सीधी सी बात है कि ईरान में कोई भी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा। इन वास्तविकताओं के दृष्टिगत अमेरिका से वार्ता गलत है यहां तक कि अगर वार्ता करने वाला सही आदमी भी हो तब भी और उन लोगों से वार्ता मज़ाक और पूरी तरह अर्थहीन है जो न नैतिकता और न ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति कटिबद्ध हैं।